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छत्तीसगढ़दुर्ग

इस दिवाली, पत्रकारों के घर में भी रोशनी जलाएँ — उनका सहयोग करें..आपका छोटा अनुदान, किसी पत्रकार के जीवन में बड़ी रोशनी बन सकता है

दुर्ग : पत्रकार — यह वह नाम है, जो समाज की सच्चाई को सामने लाने के लिए हर दिन संघर्ष करता है। कभी तपती धूप में, कभी बरसते पानी में, तो कभी आधी रात को किसी हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंच जाता है। जनता तक सच पहुंचाने के लिए वह अपनी जान जोखिम में डाल देता है, पर अफसोस यह है कि समाज अक्सर भूल जाता है कि पत्रकार भी इंसान है… उसका भी एक परिवार है।

पत्रकार दिन-रात जनसेवा की भावना से काम करता है। वह दूसरों के हक की आवाज उठाता है, भ्रष्टाचार उजागर करता है, प्रशासन की लापरवाही दिखाता है, गरीबों की व्यथा को शब्द देता है। लेकिन जब वही पत्रकार किसी मुश्किल में पड़ता है, तो उसके लिए कोई आगे नहीं आता। न सरकार, न समाज, न ही वे लोग जिनके लिए उसने आवाज उठाई थी।

बरसात में कैमरा और माइक संभालते हुए, धूप में पसीना बहाते हुए, सड़कों पर भागते हुए — पत्रकार सिर्फ खबर नहीं ढूंढता, बल्कि सच्चाई का प्रमाण लेकर आता है। वह दूसरों की तकलीफ को दिखाता है, पर अपनी पीड़ा किसी को नहीं बताता। उसकी डायरी में सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि संघर्ष की कहानियाँ भी दर्ज होती हैं।

आज आवश्यकता है कि समाज और शासन, दोनों यह समझें कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेगा, तो सच्चाई तक पहुंचना असंभव हो जाएगा।

पत्रकार भी चाहता है सम्मान, सहयोग और सुरक्षा। क्योंकि उसके पीछे भी एक परिवार है जो हर बार उसकी सकुशल वापसी की दुआ करता है।
इस दिवाली, जब आप अपने घरों को रोशनी से सजाएँ — तो एक दीपक उन पत्रकारों के नाम भी जलाएँ, जो दिन-रात आपके लिए सच्चाई की रोशनी जलाए रखते हैं।

तो आइए, इस दिवाली हम सब मिलकर कहें
“हम पत्रकारों का सम्मान करेंगे, उनका सहयोग करेंगे, क्योंकि वे हमारे समाज की आवाज हैं।”

आप भी इस दिवाली, अपना छोटा सा अनुदान देकर पत्रकारों का सहयोग करें।
आपका छोटा योगदान किसी पत्रकार के जीवन में बड़ी रोशनी बन सकता है।

अगर आप सहयोग करना चाहते हैं,
तो नीचे दिए गए QR कोड को स्कैन करके अपना सहयोग दें।

आपका छोटा सा योगदान किसी पत्रकार के जीवन में बड़ी रोशनी ला सकता है।

 आपके सहयोग और संवेदना के लिए हृदय से आभार।

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